सरकार की आसान ऋण योजना | Government’s easy loan scheme

 सरकार की आसान ऋण योजना

सरकार छोटी-ऋण योजनाओं को शुरू करने का विचार कर रही है जिससे ग्रामीण परिवारों को आसानी से ऋण मिल सकेगा और उन्हें गरीबी से बाहर निकालने में मदद मिलेगी। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी को कम करने की दिशा में यह एक नया कदम उठा रही है। 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना के अनुसार,2019 के भीतर इस योजना के लिए काम करने के लिए 8.5 करोड़ गरीब परिवारों को शामिल किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य परिवारों को क्रेडिट प्रदान करना है। इस योजना में अगले 3 से 5 वर्षों में प्रत्येक परिवार को रियायती ब्याज दर पर एक लाख रुपए तक का ऋण दिया जाता है।

ग्रामीण विकास सचिव अमरजीत सिन्हा ने कहा की हमने ऋण देने की प्रक्रिया को सरल बनाया है।हम प्रत्येक घर आजीविका के विवरणों में एकत्र किया है जिससे कि धन वितरित किया जा सके।

2019 तक प्रति वर्ष 60,000 करोड़ रुपये की राशि लगभग 8.5 करोड़ परिवारों को मिलेगी जिनको सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना के आधार पर सूचि में शामिल किया गया है। ऐसा करके, सरकार स्थानीय साहूकारों और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों पर निर्भरता कम करना चाहती है। क्योंकि इन साहूकारों ने उच्च ब्याज दर का शुल्क लगाया है, जबकि बैंकों द्वारा 11% शुल्क लगाया जाता है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय और कृषि और पशुपालन मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। जिससे मुर्गी पालन और बकरी पालन और स्थापना करने के लिए ऋण प्रक्रिया को कम किया जा सकता है। हम ऋण प्रदान करके विविध आजीविका अवसर बनाना चाहते हैं जो परिवारों को अपने संसाधनों और कौशल का उपयोग करने में मदद करेगा।

सरकार ने अपनी पात्रता मानदंड की योजना ठीक से बनाई है। इस पर जोर दिया जा रहा है।

  • स्थानीय ऋणदाताओं और अन्य वित्त कंपनियों पर ग्रामीण निर्भरता कम करें- सरकार चाहती है कि स्थानीय परिवारों का बोझ कम (सरकार द्वारा घरों को ऋण देने) होना चाहिए। सरकार चाहती है कि ग्रामीण लोगों के लिए घरेलू सुधार की भलाई के लिए बैंकों को प्रति वर्ष 60,000 करोड़ रुपये में अपने ऋण को दोगुना करना चाहिए। इसके पीछे मुख्य मापदंड ग्रामीण परिवारों पर स्थानीय साहूकारों और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के प्रभाव को कम करना है क्योंकि ये कंपनियां उच्च ब्याज दरों पर ग्रामीणों को ऋण का भुगतान करती हैं जो बाद में उधारकर्ताओं के लिए एक बोझ बन जाती हैं।
  • परिवार के लिए ऋण प्रक्रिया- ग्रामीण विकास मंत्रालय और कृषि और पशुपालन मंत्रालय के बीच एक प्रस्ताव हुआ है जिसमें काम करने लिए मुर्गीपालन खेत या बकरी पालन सहित परिवारों को ऋण देने के लिए।
  • ब्याज सहायता प्रदान करना- ग्रामीण विकास मंत्रालय ऋण पर 7% ब्याज पर 3% ब्याज सब्सिडी प्रदान करने की योजना बना रहा है। जिससे कि उधारकर्ताओं को 4% पर प्रभावी ब्याज दर का भुगतान करना होगा।
  • विस्तार के लिए अन्य सहयोग- डेयरी शुरू करने के लिए बेहतर बाजार सरकार ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ सहयोग किया है। सरकार एसएचजी (स्वयं सहायता समूह) तमिलनाडु के पंचायत स्तर संघ और तेलंगाना के स्ट्री निधि सहकारी जैसे ऋण सहायता समूहों के लिए ऋण देने के लिए राज्यों में विभिन्न ऋण मॉडल से जुड रही है। इस तरह के सहायता समूहों द्वारा ग्रामीण ऋण 2015-16 में 40% बढ़कर 30,000 करोड़ रुपये हो गए हैं। 2011 से इन फर्मों द्वारा दिए गए कुल ऋण 70,000 करोड़ रुपये था ताकि गांवों को बेरोजगारों को नौकरियों के लिए उन्हें पाने में सहायता मिल सके।

इस नई योजना से उधारकर्ता पर ब्याज का बोझ कम हो जाएगा और उनकी गुणवत्ता बढ़ जाएगी।

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